दोस्तों नेक काम करने के लिये ज़रूरी नहीं आप पैसे वाले हो तभी कर सकते है. अगर दिल में कुछ करने की इच्छाशक्ति हो तो भलेही आप ग़रीब हो तब भी आप कोई नेक काम कर सकते हो जिससे आपका नाम हो जाये.
इस कहावत को सच किया है मुंबई के सतीश गुप्ता ने जो मुंबई के सायन इलाक़े में वड़ा पाव बेचते है Satish Gupta selling Vada Pav to school children in Mumbai for just Rs 5. एक तरफ मुंबई में जहा सभी जगह आज दिनों में वड़ा पाव Vada Pav कम से कम १५ रुपये या फिर २० रूपये में बिक रहा है वही सतीश गुप्ता की ख़ास बात यह है की आज भी वह बच्चों को ५ रुपये में वड़ा पाव बेचते है ताकि वह बच्चों की भूख मिटा सके.
सतीश गुप्ता का मानना है की उन्होंने ग़रीबी देखी है इसलिए वह अपनी काबिलियत के हिसाब से बच्चों की भूख मिटाने के लिए एक छोटा सा प्रयास करते है। बिना किसी प्रॉफिट लिए बच्चों कें लिए वड़ा पाव Vada Pav का यह रेट रखा है.
सतीश बहुत गरीब परिवार से आते हैं, उनके पिता ग़रीबी के चलते उन्हें 7वीं से ज्यादा पढ़ा नहीं सके. सतीश के पास कोई रास्ता नहीं बचा था इसिलए उन्होंने कई जगहों पर छोटे-मोटे काम करने शुरू कर दिए थे।
एक समय उन्होंने कैंटीन की भी शुरुआत कि लेकिन कुछ वक्त बाद बंद हो गया. बाद में सतीश ने वड़ा पाव के स्टाल की शुरुआत की जिसमें उनकी मदत की उनकी पत्नी रीमा गुप्ता ने।

यही नहीं ग़रीबी के चलते सतीश अपने बड़े बेटे को भी नहीं ज़्यादा पड़ा सके और वह भी उनके इस वड़ापाव स्टाल में उनकी मदत करता है। भूख की क़ीमत समझनेवाले सतीश ने बच्चों के लिए जब से ५ रुपये के वड़ा पाव की सुविधा शुरू की तब से उनकी ज़िंदगी में भी काफ़ी बदलाव आया। पहले जो लोग उन्हें हेय दृष्टि से देखते थे की वह रोड पर धंधा करते है आज वह उन्हें बड़े सम्मान के साथ आदर करते है.
